सरेंडर करना चाहता था अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद

अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम 1993 में मुंबई बम धमाके के 15 महीने बाद सरेंडर करना चाहता था। वह सरेंडर करने के लिए उस वक्त के सीबीआई डीआईजी नीरज कुमार से तीन बार बात भी कर चुका था लेकिन कुछ कारणों से एजेंसी उसके ऑफर को स्वीकार नहीं कर पाई और वह आज भी भारत की पकड़ से दूर है। डी-कंपनी के नाम से काले कारनामे करने वाले दाऊद से बतौर सीबीआई अफसर कुमार ने तीन बार बात की थी। दाऊद मुंबई बम धमाकों में मुख्य आरोपी है। अपने दुश्मनों से दाऊद को था डर एक किताब पर काम कर रहे कुमार ने एक अंग्रेजी अखबार से कहा, 'मैंने जून 1994 में तीन बार दाऊद इब्राहिम से बात की थी। वह सरेंडर करने पर विचार कर रहा था लेकिन उसे एक चिंता थी। उसे डर था कि जब वह भारत वापस आएगा तो उसके राइवल उसे खत्म कर देंगे। मैंने उसे सुरक्षा के बारे में आश्वस्त भी किया था और कहा था कि उसकी सुरक्षा सीबीआई की जिम्मेदारी होगी। ' सीनियर अफसरों ने नहीं दिया आदेश दाऊद को वापस लाने के लिए पूरी बातचीत हो जाने के बाद कुमार के सीनियर अफसरों ने फोन पर बातचीत करने का सिलसिला खत्म करा दिया। कुमार का कहना है कि इतने सालों में उन्हें आजतक यह समझ में नहीं आया कि आखिर उस वक्त की सरकार (पीवी नरसिम्हा राव पीएम थे) का उन आदेश से लेना देना था कि नहीं। बता दें कि जुलाई 2013 में दिल्ली पुलिस कमिशनर के पद से रिटायर होने वाले कुमार मुंबई 12 मार्च 1993 को हुए 13 धमाकों में सीबीआई जांच का नेतृत्व कर रहे थे। मुंबई में एक के बाद एक सिलसिलेवार धमाकों में 257 लोगों की जान गई थी और 700 लोग घायल हुए थे।

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