युवा मंत्र

नेतृत्व करते समय ध्यान रखेंगे ये बातें तो हमेशा होगा लाभ

सत्ता स्वभाव से ही नरभक्षी होती है। उस पर बैठने वाले को खा जाती है। शुरुआत से ही जमीर कुतरना शुरू करती है। इसीलिए जब कोई सत्ता पर बैठता है तो आचरण का संतुलन खो बैठता है। सत्ता केवल राजनीतिक सत्ता नहीं होती, जिसके लिए नेता जीवन दांव पर लगा देते हैं। सत्ता परिवार में मुखिया की भी हो सकती है, किसी व्यवस्था में नेतृत्व की भी हो सकती है और एक सबसे बड़ी सत्ता है आपके अपने होने की। इसमें आपको अपनी इंद्रियों पर राज करना पड़ता है। यह आंतरिक सत्ता है परंतु इतना ध्यान रखें कि हर सत्ता नरभक्षी है। निज मन ही निज तन को खाए ऐसा कहा गया है। इसलिए मन से संचालित हमारी इंद्रियां हमें कुतर लेती हैं।